📖 कहानीबाबू

हमनवा गधा

📚 मुल्ला नसरुद्दीन की कहानियाँ

एक मर्तबा मुल्ला जी गधे पर तरकारी लाद कर बेचने के लिए निकले। जब वो आवाज़ लगाते तो गधा भी साथ साथ रेंकता और उनकी आवाज़ सुनाई न देती। वो एक सड़क पर पहुंचे जहाँ बहुत बड़ा मजमा था। उन्होंने बहुत ज़ोर से सदा लगाई और गधा भी उनके साथ साथ इतने ज़ोर से रेंका कि उनकी आवाज़ बिल्कुल दब कर रह गई। इस पर मुल्ला जी को ग़ुस्सा आ गया। उन्होंने गधे के डंडा मार कर कहा, बता तरकारी मैं बेच रहा हूँ या तू?

‹ गोश्त कहाँ गया

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